नेपाल। नेपाल के भोटेकोशी नदी में बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने तीन ज़िलों में भारी तबाही मचाई। अब तक की जानकारी के अनुसार इसमें कम से कम 160 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है । जबकि सुरक्षा बलों के जवान और विदेशी पर्यटकों समेत बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं।

इस आपदा में जान-माल का भारी नुक़सान हुआ है। यह हाल के वर्षों में नेपाल की सबसे भीषण आपदाओं में से एक है। इस बाढ़ में लगभग 40 किमी का रोड पूरी तरह तबाह हो चुका है जबकि कई पुल भी इसकी भेट चढ़ गए । बाढ़ उस समय आई जब एक हिमस्खलन ने भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ल्हेंदे का बहाव रोक दिया। इसके बाद बाढ़ सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी के नज़दीक तिमुरे में पहुँची. सैकड़ों लोगों की आबादी वाले इस इलाक़े का बड़ा हिस्सा बह गया और इसके बाद बाढ़ का पानी तेज़ी से नीचे की ओर बढ़ा।
इलाक़े में बारिश की कोई सूचना नहीं थी, इसलिए लोगों को इस आपदा की कोई चेतावनी नहीं मिली। बाढ़ आने के समय लोग रोज़मर्रा के काम में व्यस्त थे । रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने नेपाल के अंग्रेज़ी अख़बार काठमांडू पोस्ट से बताया कि बुधवार सुबह जब उन्हें ज़मीन हिलती हुई महसूस हुई तो उन्हें पहले लगा कि भूकंप आया है। जब वह बाहर भागकर आए, तो उन्होंने ऊपर से तेज़ी से आती पानी की एक विशाल दीवार देखी. इसके साथ धुएं के गुबार जैसी चीज़ भी दिखाई दे रही थी और पानी तिमुरे बाज़ार की ओर तेज़ी से बढ़ रहा था।
ढुंगाना ने द काठमांडू पोस्ट से कहा, बाढ़ एक लहर की तरह आई, जिसकी ऊंचाई करीब 100 मीटर रही होगी और बाज़ार को अपने साथ बहा ले गई। कुछ ही पलों में पूरा बाज़ार ख़त्म हो गया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, 391 विदेशी नागरिकों और 44 सुरक्षा कर्मियों समेत सैकड़ों लोग लापता हैं। लापता लोगों में भारत के भी 300 से अधिक लोंग होने की संभावना जताई जा रही है ।
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