
डॉ. स्नेहा मनचंदा (प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ)
बरसात की फुहारें अपने साथ ठंडी हवाएँ, भीगी मिट्टी की मनमोहक खुशबू और गर्मी से राहत लेकर आती हैं। जहा यह मौसम अधिकांश लोगों के लिए सुकून और आनंद का प्रतीक होता है । वहीं गर्भवती महिलाओं के लिए इस मौसम मे सावधानियाँ बरतना आवशयक है।
गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई शारीरिक और हार्माेनल परिवर्तन होते हैं। इन परिवर्तनों के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) में भी बदलाव आता है, जिससे कुछ संक्रमणों का खतरा बढ़ सकता है। मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी, दूषित भोजन एवं पानी तथा मच्छरों की संख्या में वृद्धि के कारण कई ऐसी बीमारियाँ फैलती हैं जिनसे गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता होती है।
हालाँकि इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि गर्भवती महिलाओं को बारिश से डरने की आवश्यकता है। सही जानकारी और कुछ सरल सावधानियों के साथ इस मौसम का भरपूर आनंद लिया जा सकता है ।
मानसून में गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त सावधानी क्यों आवश्यक हैं?
बारिश का मौसम कई प्रकार के संक्रमणों के फैलने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। रुके हुए पानी (जैसे तालाब का पानी या बालटी में पड़ा हुआ पानी ) में मच्छरों के पनपने से डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वहीं दूषित भोजन और पानी के कारण टाइफॉयड, हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस ई तथा पेट और आँतों से संबंधित अन्य संक्रमण होने की संभावना भी बढ़ जाती है।
इसके अलावा, मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी और मौसम में अचानक होने वाले बदलाव के कारण सर्दी, जुकाम, वायरल संक्रमण, खाँसी तथा श्वसन संबंधी समस्याएँ भी अधिक देखने को मिलती हैं। जिन महिलाओं को पहले से अस्थमा (दमा) या एलर्जी की समस्या है, उनमें इस मौसम में लक्षण बढ़ सकते हैं (Asthma Exacerbation)। ऐसे में साँस फूलना, घरघराहट (Wheezing), लगातार खाँसी या सांस लेने में तकलीफ़ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
गर्भवती महिला के लिए बुखार और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) केवल असुविधा का कारण नहीं होते, बल्कि इनका समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक होता है ताकि माँ और शिशु दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।
पहली सुरक्षा – स्वच्छ भोजन और सुरक्षित पेयजल
मानसून में सबसे महत्वपूर्ण सावधानी है सुरक्षित और स्वच्छ पानी का सेवन। हमेशा उबला हुआ या शुद्ध (फ़िल्टर किया हुआ) पानी ही पिएँ और संदिग्ध स्रोतों के पानी से बचें।
भोजन की स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखें। घर का ताज़ा बना हुआ भोजन सबसे सुरक्षित होता है। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धो कर ही खाएँ। कटे हुए फल, कच्चे खाद्य पदार्थ तथा सड़क किनारे मिलने वाले खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि उनकी स्वच्छता सुनिश्चित नहीं होती।
अक्सर यह गलत धारणा होती है कि मानसून में गर्भवती महिला को कम या हल्का भोजन करना चाहिए। वास्तव में गर्भावस्था के दौरान संतुलित और पौष्टिक आहार माँ और शिशु दोनों के स्वस्थ विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
मच्छरों से बचाव है बेहद ज़रूरी
गर्भावस्था में डेंगू और मलेरिया गंभीर जटिलताएँ उत्पन्न कर सकते हैं, इसलिए मच्छरों से बचाव अत्यंत आवश्यक है। मच्छरदानी का प्रयोग करें, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें तथा घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। यदि तेज़ बुखार, शरीर में तेज़ दर्द, सिरदर्द, त्वचा पर चकत्ते, लगातार उल्टी या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
गंदगी और फिसलन से बचाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है
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