लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सरकारी भर्तियों में आरक्षण संबंधी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सरदार सेना के नेतृत्व में चल रहा “आरक्षण बचाओ पदयात्रा” आंदोलन अब वार्ता के दौर में पहुंच गया है। प्रयागराज के इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 26 अगस्त को शुरू हुई पदयात्रा 2 सितंबर को लखनऊ पहुंची, जहां बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और आरक्षण समर्थकों ने प्रदर्शन किया।
आंदोलन के दौरान सरदार सेना के संस्थापक डॉ. आर.एस. पटेल के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई। पदयात्रा के लखनऊ पहुंचने के बाद उप मुख्यमंत्री एवं विधान परिषद के नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने आंदोलन कर रहे नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया।
आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, सरदार सेना के संरक्षक अविनाश काकड़े के नेतृत्व में संबंधित अभ्यर्थियों का प्रतिनिधिमंडल उप मुख्यमंत्री के समक्ष वार्ता के लिए पहुंचा और भर्ती एवं आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रूप से अपनी बात रखी। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जिन भर्तियों में आरक्षण संबंधी विसंगतियों के आरोप हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाए और अभ्यर्थियों को न्याय दिलाया जाए।

3 सितंबर को जारी हुआ बैठक का पत्र-
इसी बीच 3 सितंबर 2026 को उप मुख्यमंत्री/नेता सदन विधान परिषद के कार्यालय से एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया है। पत्र में उप मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार विधान परिषद के प्रथम एवं तृतीय सत्र में बेसिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित उठाए गए विषयों पर पीठ द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में मामलों के निराकरण के लिए बैठक बुलाए जाने की जानकारी दी गई है।
पत्र के अनुसार बैठक 8 सितंबर 2026 को अपराह्न 3 बजे, कक्ष संख्या-77, प्रथम तल, विधान परिषद भवन में आयोजित की जाएगी। पत्र में संबंधित माननीय सदस्यों से बैठक में प्रतिभाग करने का अनुरोध किया गया है।
आंदोलनकारियों ने उठाए ये प्रमुख मुद्दे-
सरदार सेना की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में 68500 शिक्षक भर्ती ,69 हजार शिक्षक भर्ती सहित विभिन्न भर्तियों में ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ न दिए जाने के कारण इसे आरक्षण घोटाला कह कर सवाल उठाए गए हैं। संगठन का आरोप है कि कई भर्तियों में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
पदयात्रा के माध्यम से सरकार के सामने प्रमुख रूप से ये मांगें रखी गईंकृ
1. आरक्षण रोस्टर को सार्वजनिक किया जाए।
2. विभागवार एवं श्रेणीवार पदों की स्पष्ट जानकारी जारी की जाए।
3. चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं लगातार भर्तियों में हो रहे आरक्षण घोटाले के सम्पूर्ण समाधान के लिए आरक्षण न्यायिक निगरानी आयोग का गठन किया जाए।
4. भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र निगरानी एवं सामाजिक ऑडिट की व्यवस्था हो।
5. आरक्षण से संबंधित शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रभावी एवं कठोर कानून बनाया जाए।
6. आरक्षण नियमों के उल्लंघन पर संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय कर सजा का प्राविधान तय किया जाए।
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि 2 सितंबर के प्रदर्शन और उसके बाद हुई बातचीत के पश्चात 3 सितंबर को बैठक के लिए आधिकारिक पत्र जारी होना आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि, आंदोलनकारियों के बीच इस बात को लेकर नाराजगी भी है कि पहले उप मुख्यमंत्री स्तर पर सीधे वार्ता के बाद अब विभागीय/विधान परिषद स्तर पर बैठक का औपचारिक प्रस्ताव दिया गया है।
अब सभी की निगाहें 8 सितंबर की प्रस्तावित बैठक पर हैं। आंदोलनकारियों की मांग है कि बैठक केवल औपचारिकता न बनकर रहे, बल्कि आरक्षण और भर्ती से जुड़े मामलों में ठोस निर्णय लिया जाए तथा प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय मिले।
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