इलाहाबाद । इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आयुष मलिक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निपटारा करते हुए उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहाल कर दी है। जस्टिस संदीप जैन ने कहा कि आयुष मलिक बालिग हैं और अपने जीवन से जुड़े फ़ैसले लेने में सक्षम हैं।
क़ानूनी मदद देने वाली संस्था एसोसिएशन फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट (एपीसीआर) ने आयुष मलिक को क़ानूनी सहायता मुहैया कराई थी। अदालत के सामने आयुष ने कहा कि उन्होंने 2014 में अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया था और इस फ़ैसले में किसी तरह का दबाव, धमकी, अनुचित प्रभाव या प्रलोभन नहीं था।
ख़बरों के अनुसार अदालत ने माना कि वो बालिग हैं और ये उनका हक़ है कि वो जिस धर्म को चाहें उसे मानें और जिससे शादी करना चाहें उससे शादी करें। इसमें किसी स्टेट या किसी तीसरे आदमी का कोई रोल नहीं हो सकता है।
ग़ौरतलब है कि इस साल जून महीने में आयुष के पिता देवराज मलिक की शिकायत के बाद शामली पुलिस ने कथित साज़िशन धर्म परिवर्तन के आरोप में उनकी कथित पत्नी चांदनी क़ुरैशी और ससुर इस्लाम क़ुरैशी को गिरफ़्तार किया था।
आयुष मलिक की बंदी प्रत्यक्षीकरण से जुड़ी याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर की गई थी जिस पर बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आयुष मलिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहाल कर दी है। हाई कोर्ट ने कहा कि आयुष बालिग हैं और अपने जीवन से जुड़े फ़ैसले लेने में सक्षम हैं।
अदालत के सामने आयुष ने कहा कि उन्होंने 2014 में अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया था और इस फ़ैसले में किसी तरह का दबाव, धमकी, अनुचित प्रभाव या प्रलोभन नहीं था। उन्होंने चांदनी क़ुरैशी से शादी करने की इच्छा भी जताई। कोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति को अपनी अंतरात्मा के अनुसार धर्म चुनने और अपने जीवनसाथी का चुनाव करने का संवैधानिक अधिकार है।

आयुष मलिक अपने वकील नदीम के साथ
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