हैदराबाद। कहीं कोई दुर्घटना या परेशानी आती है तो आम इंसान सबसे पहले अपनो को बचाने या मुसीबत से निकालने का काम करता है । लेकिन कुछ लोगों का जज़्बा आम इंसान से ऊपर का होता है जो सबके लिए एक फरश्तिा बनकर काम करता है । उन्हीं में से एक हैं पीर खान । मैं अपनी बेटी को नहीं ढूंढ रहा था। मैंने सबसे पहले जिन 12 बच्चों को देखा, उन्हें बाहर निकाला. हमारी पाँच दिन की बच्ची की दम घुटने से मौत हो गई।
ये अल्फाज़ पीर ख़ान के हैं, उन्होंने कहा, क्या वे सब किसी और के बच्चे नहीं थे? मैं उन्हें कैसे छोड़ सकता था?
अधिकारियों ने बताया कि 21 सितंबर की रात 11-40 बजे आदिलाबाद के आरआईएमएस अस्पताल के एसएनसीयू में लगी आग में पीर ख़ान की बेटी समेत पांच नवजात शिशुओं की मौत हो गई।
पीर ख़ान एक दुकान चलाते हैं. उनके दो बेटे हैं। हाल ही में उनकी एक बेटी का जन्म हुआ था। तेलंगाना के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा ने कहा, प्रारंभिक जांच के अनुसार, एसएनसीयू के एसी यूनिट में शॉर्ट सर्किट के कारण आग और जहरीली गैसें निकलीं।
मंत्री राजनरसिम्हा ने कहा, दुर्घटना के समय एसएनसीयू में कुल 27 नवजात थे। बचाए गए बाक़ी बच्चों को आदिलाबाद के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है। तेलंगाना सरकार ने इस दुर्घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया है। दामोदर राजनरसिम्हा ने कहा, समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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