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अलीगढ़ से इलिनॉय तक- मुस्लिम यूनिवर्सिटी यूनियन को मिलेंगे नए लीडर, अमेरिका में चमकी सबा हैदर

सैय्यद अतीक उर रहीम
शिक्षक एवं पत्रकार

आज सुबह जब रीडर्स के हाथों में अखबार होगा, एएमयू स्टूडेंट्स को अपने नए मुस्तकबिल के लीडर मिल गए होंगे, अब उनको छात्रों का भरोसा जीतने में लग जाना चाहिए। क्योंकि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन का चुनाव सिर्फ एक पद जीतना नहीं है, यह एक बड़ी विरासत को संभालने की जिम्मेदारी है। 05 नवंबर देर रात जब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन का रिजल्ट आ गया, और एक नया अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव चुना जा चुका है और ठीक ऐसे वक्त अमेरिका से आई सबा हैदर की जीत की खबर यह बता रही है कि अलीगढ़ का लीडर कितनी दूर तक जा सकता है।
सबा हैदर ने अमेरिका के इलिनॉय राज्य के 84वें डिस्ट्रिक्ट से स्टेट हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव जीता है। सबा हैदर ने एएमयू से एम.एससी. वाइल्डलाइफ साइंस में पढ़ाई की है। वे डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार थीं और प्रोजेक्टेड विनर के तौर पर उनकी जीत ने पूरे एएमयू कैंपस को गर्व से भर दिया है। यह जीत इस बात का सबूत है कि अलीगढ़ की बेटी अमेरिका की विधानसभा में भी कानून बना सकती है।

सबा हैदर

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के नए पदाधिकारियों को ये समझना होगा कि सर सैयद अहमद खान ने जब 1875 में मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज की बुनियाद रखी थी, तो उनका ख्वाब सिर्फ एक कॉलेज बनाना नहीं था। सर सैयद अहमद खान चाहते थे कि यहां से ऐसे लोग निकलें जो आधुनिक शिक्षा, तर्क और लोकतंत्र की भाषा समझें। उसी ख्वाब से एएमयू स्टूडेंट यूनियन का जन्म हुआ। स्टूडेंट यूनियन यहां के छात्रों के लिए संसद की पहली पाठशाला बना, जहां भाषण देना, बहस करना और अपनी बात मनवाना सिखाया जाता है। यही वजह है कि यहां से निकले लोग सिर्फ नौकरी नहीं करते, वे इतिहास बनाते हैं।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की परंपरा का सबसे चमकदार नाम हैं। मौलाना मोहम्मद अली जौहर अलीगढ़ के छात्र थे और यहीं से उनकी सियासी जिंदगी की शुरुआत हुई। बाद में वे खिलाफत आंदोलन के सबसे बड़े नेता बने, जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना में उन्होंने अहम भूमिका निभाई और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अग्रिम पंक्ति में खड़े हुए। उनकी तकरीरों में जो जोश था, वह अलीगढ़ की डिबेटिंग सोसाइटी से ही पैदा हुआ था। आज जो छात्र अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का चुनाव लड़े हैं, उन्हें मौलाना मोहम्मद अली जौहर की इस विरासत को याद रखना चाहिए।
लियाकत अली खान ने भी अलीगढ़ से ही अपनी सियासी तालीम हासिल की। लियाकत अली खान बाद में पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने। अलीगढ़ में छात्र जीवन के दौरान ही उनमें नेतृत्व की क्षमता दिखने लगी थी। वे एएमयू के उन छात्रों में थे, जिन्होंने बाद में दो देशों की तकदीर पर असर डाला। आज 05 नवंबर देर का जो रिजल्ट आया, उसमें जीतने वाले छात्रों को यह समझना होगा कि अलीगढ़ का लीडर सिर्फ कैंपस का लीडर नहीं होता, वह कल को देश की तकदीर भी बदल सकता है।
डॉ. जाकिर हुसैन का नाम अलीगढ़ के बिना अधूरा है। डॉ. जाकिर हुसैन अलीगढ़ के छात्र, शिक्षक और बाद में कुलपति भी रहे। वे भारत के तीसरे राष्ट्रपति बने। डॉ. जाकिर हुसैन की सादगी, विद्वता और शिक्षा के प्रति लगाव ने उन्हें राष्ट्रपति भवन तक पहुंचाया। वे इस बात का सबूत हैं कि अलीगढ़ का छात्र सिर्फ राजनीति ही नहीं, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में भी सबसे आगे रहता है। स्टूडेंट यूनियन के नए लीडरों को डॉ. जाकिर हुसैन की तरह शिक्षा को सबसे ऊपर रखना होगा।

मोहम्मद हामिद अंसारी ने भी अलीगढ़ की विरासत को आगे बढ़ाया। मोहम्मद हामिद अंसारी एएमयू के कुलपति रहे और बाद में भारत के उपराष्ट्रपति बने। मोहम्मद हामिद अंसारी ने दुनिया भर में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनकी कामयाबी यह बताती है कि अलीगढ़ का छात्र अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी पहचान बना सकता है। ठीक वैसे ही जैसे आज सबा हैदर ने अमेरिका में बनाई है। स्टूडेंट यूनियन के चुनाव में जीतने वालों को मोहम्मद हामिद अंसारी की शालीनता और विद्वता से सीखना चाहिए।
नसीरुद्दीन शाह और जावेद अख्तर जैसे नामों ने अलीगढ़ को सांस्कृतिक दुनिया में भी मशहूर किया। नसीरुद्दीन शाह ने अलीगढ़ से पढ़ाई की और भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी। जावेद अख्तर ने अलीगढ़ से पढ़ाई की और बाद में भारतीय फिल्म जगत के सबसे बड़े गीतकार और शायर बने। जावेद अख्तर राज्यसभा के सदस्य भी रहे। उनकी शायरी और उनकी सोच में अलीगढ़ की तहजीब साफ झलकती है। स्टूडेंट यूनियन का चुनाव जीतने वाले छात्र अगर सिर्फ राजनीति तक सीमित रहे, तो वे इस सांस्कृतिक विरासत से धोखा करेंगे।
ख्वाजा अहमद अब्बास, मजाज़ लखनवी, जां निसार अख्तर और अली सरदार जाफरी ने अलीगढ़ की गलियों में ही अपनी शायरी और लेखन को धार दी। ख्वाजा अहमद अब्बास भारत के सबसे बड़े फिल्मकारों और पत्रकारों में गिने जाते हैं। मजाज़ लखनवी की शायरी आज भी अलीगढ़ के हॉस्टलों में गूंजती है। अली सरदार जाफरी ने उर्दू साहित्य को नई ऊंचाई दी। इन सभी नामों ने यह साबित किया कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की परंपरा सिर्फ सियासत की नहीं, बल्कि अदब और संस्कृति की भी है।
अलीगढ़ की बेटियों ने भी हर मैदान में झंडा गाड़ा है, और सबा हैदर इस कड़ी की ताजा मिसाल हैं। सबा हैदर की जीत सिर्फ एक व्यक्ति की जीत नहीं है, यह एक महिला, एक वैज्ञानिक और एक अलीगेरियन की जीत है। सबा हैदर ने वाइल्डलाइफ साइंस पढ़ी, जो पर्यावरण, जंगल और जानवरों से जुड़ा विषय है। आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन से जूझ रही है, ऐसे समय में एक वाइल्डलाइफ वैज्ञानिक का कानून बनाने वाली जगह पर पहुंचना पर्यावरण के लिए भी अच्छी खबर है। स्टूडेंट यूनियन के नए लीडरों को सबा हैदर से यह सीखना चाहिए कि शिक्षा ही असली ताकत है।
नजमा हेपतुल्ला और मोहसिना किदवई जैसी नेताओं ने भी अलीगढ़ से निकलकर राजनीति में नाम कमाया। नजमा हेपतुल्ला राज्यसभा की उपसभापति और बाद में मणिपुर की राज्यपाल बनीं। मोहसिना किदवई केंद्रीय मंत्री रहीं और उन्होंने महिला अधिकारों के लिए बड़ा काम किया। नजमा हेपतुल्ला और मोहसिना किदवई की कामयाबी ने यह रास्ता खोला था, जिस पर चलकर आज सबा हैदर अमेरिका तक पहुंची हैं। आज स्टूडेंट यूनियन के चुनाव में अगर कोई छात्रा जीतती है, तो उसे नजमा हेपतुल्ला और मोहसिना किदवई की विरासत को आगे बढ़ाना होगा।
इस्मत चुगताई और कुर्रतुल ऐन हैदर ने उर्दू साहित्य में अलीगढ़ की बेटियों का नाम रोशन किया। इस्मत चुगताई को उर्दू साहित्य की सबसे बोल्ड लेखिका माना जाता है। कुर्रतुल ऐन हैदर को उर्दू की सबसे बड़ी उपन्यासकार माना जाता है। इस्मत चुगताई और कुर्रतुल ऐन हैदर ने यह साबित किया कि अलीगढ़ की लड़की सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, वह कलम से भी समाज को बदल सकती है। सबा हैदर ने भी कलम और किताब की ताकत से ही अमेरिका तक का सफर तय किया है।
शबाना आज़मी और सायरा बानो ने बॉलीवुड में अलीगढ़ की पहचान को आगे बढ़ाया। शबाना आज़मी ने अभिनय के साथ-साथ महिला अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई। सायरा बानो हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। शबाना आज़मी और सायरा बानो दोनों का अलीगढ़ से गहरा जुड़ाव रहा है। आज जब स्टूडेंट यूनियन का चुनाव हो चुका है, तो छात्रों को शबाना आज़मी की तरह अपनी आवाज को समाज के लिए इस्तेमाल करना सीखना चाहिए।
डॉ. सैयदा हमीद जैसी महिलाओं ने शिक्षा और योजना के क्षेत्र में बड़ा काम किया। सैयदा हमीद योजना आयोग की सदस्य रहीं और उन्होंने शिक्षा और महिला अधिकारों के लिए काम किया। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, एएमयू से निकलीं महिला डॉक्टर आज भारत, ब्रिटेन, अमेरिका और खाड़ी देशों के बड़े अस्पतालों में विभागाध्यक्ष हैं। इन महिलाओं ने यह साबित किया कि अलीगढ़ की डिग्री सिर्फ एक कागज नहीं है, वह एक सोच है। सबा हैदर की जीत इसी सोच की जीत है।
इस साल का स्टूडेंट यूनियन चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि इस बार छात्रों के सामने नौकरी, शिक्षा की गुणवत्ता, हॉस्टल की सुविधाएं, महिला सुरक्षा और डिजिटल युग में यूनिवर्सिटी की पहचान जैसे मुद्दे हैं। सर सैयद अहमद खान का ख्वाब था कि अलीगढ़ का छात्र हर मुद्दे पर अपनी राय रखे। मौलाना मोहम्मद अली जौहर ने भी यही किया था। डॉ. जाकिर हुसैन ने भी यही किया था। आज देर रात रिजल्ट आने के बाद जीतने वाले लीडरों को इन मुद्दों पर काम करना होगा, सिर्फ नारों पर नहीं। सबा हैदर ने अमेरिका में मुद्दों पर काम करके ही जीत हासिल की है।
सबा हैदर की जीत ने अलीगढ़ के हर छात्र को एक संदेश दिया है कि तुम्हारी मंजिल सिर्फ अलीगढ़ की दीवारों तक नहीं है। सबा हैदर ने दिखाया कि आप अमेरिका में रहकर भी अपनी जड़ों से जुड़े रह सकते हैं और अपनी शिक्षा का इस्तेमाल समाज के लिए कर सकते हैं। लियाकत अली खान ने भी अलीगढ़ से निकलकर एक देश का नेतृत्व किया था। मोहम्मद हामिद अंसारी ने भी अलीगढ़ से निकलकर दुनिया में भारत का नाम रोशन किया था। आज AMUSU के नए लीडरों के पास भी यही मौका है कि वे अपने काम से अलीगढ़ का नाम रोशन करें।
अंत में यही कहना है कि अलीगढ़ से इलिनॉय तक का सफर लंबा है, लगभग 12,000 किलोमीटर। लेकिन सबा हैदर ने यह सफर तय करके दिखा दिया कि अलीगढ़ की डिग्री सिर्फ एक कागज नहीं है। जब अखबार में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के नए लीडरों के नाम छपेंगे, तो उन्हें यह याद रखना होगा कि उनकी तुलना अब मौलाना मोहम्मद अली जौहर, डॉ. जाकिर हुसैन, लियाकत अली खान, मोहम्मद हामिद अंसारी और सबा हैदर से होगी। इसलिए जीत के बाद उन्हें छात्रों का भरोसा जीतने में लग जाना चाहिए। AMUSU के सभी उम्मीदवारों को शुभकामनाएं, और सबा हैदर को अमेरिका की जीत के लिए दिल से मुबारकबाद।

 

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