बेंगलुरू। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बीजेपी और जेडीएस के कई नेताओं पर वोटर लिस्ट से लोगों के नाम हटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। शिवकुमार इन नेताओं के खि़लाफ़ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर बेंगलुरू में चीफ़ इलेक्टोरल ऑफ़िसर-सीईओ वी. अनबु कुमार के दफ़्तर में धरने पर बैठे हैं। सीईओ भी अपने दफ़्तर में मौजूद हैं।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार गुरुवार को क़रीब दोपहर 2.30 बजे कई मंत्रियों के साथ सीईओ के दफ़्तर पहुंचे। उन्होंने कहा कि जब तक उन बीजेपी और जेडीएस नेताओं के खि़लाफ़ एफ़आईआर दर्ज नहीं होती, तब तक वह वहां से नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने उस लोकतंत्र की पीठ में छुरा घोंपा है जिसके लिए हमारी कांग्रेस पार्टी ने देश की आज़ादी की लड़ाई लड़ी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने कहा, मैंने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की ओर से अपनाए गए फर्जी तरीकों के बारे में जानकारी लेने के लिए चुनाव आयोग को सात पत्र लिखे हैं। हाल ही में मैंने बेलगावी में यह मुद्दा उठाया था, जहां एक विधायक ने फ़ॉर्म 7 के जरिए 2,500 वोट हटाने के लिए पत्र लिखा था।
हमें किसी के भी फ़ॉर्म 7 दाखिल करने पर कोई आपत्ति नहीं है। हर बीएलओ को केवल 50 फ़ॉर्म देने की अनुमति है। लेकिन दुर्भाग्य से, बीजेपी नेताओं की ओर से जमा किए गए फ़ॉर्म प्रिंटेड हैं, जिन पर नाम और ईपीआईसी नंबर पहले से ही छपे हुए हैं।
उन्होंने कहा, बीजेपी नेताओं ने माफ़ी मांगी है और हमने उनके माफ़ीनामे और मतदाताओं के नाम हटाने के अनुरोध वापस लेने वाले पत्र भी पेश किए हैं। हम जानना चाहते हैं कि वह कौन सी एजेंसी है, जिसने फ़ॉर्म (फ़ॉर्म 7) छपवाए और उन्हें बांटा।
सीईओ के साथ शुरुआती दौर की बातचीत के बाद वह पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, हमने खाना नहीं खाया था। इसलिए सीईओ श्री अनबु कुमार हमारे लिए रवा इडली लेकर आए।
देर शाम पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी मुख्यमंत्री शिवकुमार और कैबिनेट के अन्य सहयोगियों के साथ शामिल होने के लिए पहुंचे।
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