कानपुर। उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को जनपद कानपुर में चुन्नीगंज स्थित कन्वेंशन सेंटर में ग्रामश्री एवं क्राफ्टरूट्स द्वारा आयोजित पांच दिवसीय 93वीं क्राफ्टरूट्स हस्तशिल्प प्रदर्शनी का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों के स्टालों का अवलोकन किया तथा उनसे संवाद कर उनकी कलाकृतियों, निर्माण प्रक्रिया और पारंपरिक तकनीकों के विषय में जानकारी प्राप्त की। राज्यपाल जी ने देश के कोने-कोने से आए सभी कलाकारों का स्वागत एवं सम्मान करते हुए उनके हुनर, सृजनशीलता और पारंपरिक कला को नए रूप में प्रस्तुत करने के प्रयासों की सराहना की।

प्रदर्शनी में देश के लगभग 22 राज्यों के 90 से अधिक शिल्पकार अपनी पारंपरिक हस्तकलाओं और विशिष्ट उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें फिरोजाबाद की कांच कला, छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क, मध्य प्रदेश का बाग प्रिंट तथा पश्चिम बंगाल की पट्टचित्र कला सहित देश की विविध हस्तशिल्प परंपराओं की झलक देखने को मिल रही है। इस पांच दिवसीय आयोजन में आगंतुकों को विभिन्न कलाओं को एक ही स्थान पर देखने, उनकी निर्माण प्रक्रिया समझने और सीधे शिल्पकारों से उत्पाद खरीदने का अवसर मिलेगा। प्रदर्शनी में नए शिल्प उत्पादों और स्टालों को शामिल किया गया है। आमजन की भागीदारी बढ़ाने के लिए 50 रुपये से शुरू होने वाले उत्पादों के साथ पारंपरिक हस्तकलाओं के सजीव प्रदर्शन की व्यवस्था भी की गई है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि देश के पारंपरिक हस्तशिल्प और कारीगरों का हुनर आत्मनिर्भर भारत की महत्वपूर्ण ताकत है। हस्तनिर्मित प्रत्येक उत्पाद के पीछे कारीगर का समय, परिश्रम, अनुभव और पीढ़ियों से अर्जित कौशल होता है। ऐसे कारीगरों को उचित बाजार, उनके श्रम का सही मूल्य, प्रशिक्षण और सम्मान उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि क्राफ्टरूट्स की प्रदर्शनी देश की विविधता में एकता का सजीव दर्शन कराती है। विभिन्न राज्यों के कलाकार अपनी विशिष्ट कलाओं, परंपराओं और नए उत्पादों के माध्यम से देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। यह आयोजन केवल हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि कारीगरों की आजीविका और आर्थिक सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण मंच है।

राज्यपाल जी ने कहा कि गंगा या त्रिवेणी में स्नान करने से लोग पवित्रता का अनुभव करते हैं, लेकिन यदि किसी के प्रयास से एक परिवार भी आत्मनिर्भर बनता है, तो यह उससे भी बड़ा पुण्य का कार्य है। किसी परिवार का हाथ थामना, उसे रोजगार उपलब्ध कराना और उसकी आय बढ़ाने में सहयोग देना वास्तविक सामाजिक सेवा है। जब कारीगर की आमदनी बढ़ती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। बच्चों को बेहतर शिक्षा, पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं तथा परिवार का जीवन स्तर सुधरता है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण पर भी इसका अनुकूल प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देना केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित हस्तकलाएं, कढ़ाई, बुनाई, पारंपरिक वस्त्र और अन्य कलात्मक उत्पाद हमारी सांस्कृतिक विविधता का परिचय देते हैं। क्राफ्टरूट्स जैसे आयोजन कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और नए ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर प्रदान करते हैं। प्रत्येक वर्ष कलाकार नए डिजाइन, रंग संयोजन और उत्पादों के साथ आते हैं, जो उनकी रचनात्मकता और बाजार की बदलती मांगों को समझने की क्षमता को दर्शाता है। पारंपरिक कला की मौलिकता बनाए रखते हुए उसमें नए डिजाइन और उपयोगी उत्पादों का समावेश करना आवश्यक है, ताकि इन कलाओं को आधुनिक बाजार में भी पहचान मिले। उन्होंने कहा कि कई पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे विलुप्त होने की स्थिति में हैं। यदि कारीगरों को सम्मानजनक आय और बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो नई पीढ़ी भी इन कलाओं को अपनाने के लिए प्रेरित होगी।
माननीय राज्यपाल ने पारंपरिक हुनर को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि अनुभवी शिल्पकारों ने अपने जीवन के कई दशक किसी कला को सीखने, उसमें दक्षता हासिल करने और उसे विकसित करने में लगाए होते हैं।
राज्यपाल जी ने कारीगरों की आर्थिक कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बार मेहनत और कौशल से तैयार उत्पादों का उचित मूल्य नहीं मिल पाता तथा बाजार तक सीधी पहुंच न होने के कारण कारीगरों को अपेक्षित लाभ नहीं मिलता। किसी हस्तनिर्मित वस्तु का मूल्य निर्धारित करते समय कच्चे माल की लागत के साथ उसे बनाने में लगे समय, श्रम, अनुभव और विशिष्ट कौशल को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

माननीय राज्यपाल ने जिलाधिकारी एवं जिला प्रशासन, कानपुर को निर्देशित किया कि जनपद के सभी पारंपरिक कलाकारों और शिल्पकारों की सूची तैयार कराई जाए तथा उनकी आवश्यकताओं के अनुसार उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय कलाकार अपने उत्पादों की प्रदर्शनियां आयोजित करना चाहते हैं, तो जिला प्रशासन उन्हें उपयुक्त स्थान, आवश्यक सुविधाएं और अन्य जरूरी सहयोग प्रदान करे, ताकि उनकी कला को व्यापक पहचान और बाजार मिल सके।
राज्यपाल जी ने उद्योगपतियों, अधिकारियों, विश्वविद्यालयों और आम नागरिकों से स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों की खरीद को प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विभिन्न अवसरों पर उपहार देने के लिए स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार शॉल, वस्त्र, सजावटी सामान और अन्य हस्तनिर्मित उत्पादों को प्राथमिकता दी जा सकती है। ऐसे छोटे-छोटे प्रयास भी कारीगरों की आय बढ़ाने और उनके उत्पादों को नियमित बाजार उपलब्ध कराने में सहायक होंगे। ग्राहकों को उत्पादों की विशेषताओं, निर्माण प्रक्रिया और उनमें लगने वाले श्रम के बारे में जानकारी देने से भी पारंपरिक हस्तशिल्प के प्रति रुचि बढ़ेगी।
राज्यपाल जी ने कहा कि ग्रामश्री एवं क्राफ्टरूट्स की गतिविधियां हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के साथ समाज के विभिन्न वर्गों को सहयोग देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल की आवश्यकता वाले परिवारों को सेवा उपलब्ध कराने की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे बुजुर्गों को सहायता मिलने के साथ सेवा प्रदान करने वाले व्यक्तियों के लिए भी आय के अवसर बनते हैं। संस्था द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, विद्यालयों की स्थिति और आंगनबाड़ी केंद्रों की गतिविधियों पर ध्यान देने जैसे प्रयास भी सामाजिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण, रोजगार सृजन और सामाजिक सहयोग को साथ लेकर चलने से अधिक व्यापक और स्थायी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
उन्होंने बच्चों में आत्मविश्वास और अपनी क्षमताओं के प्रति जागरूकता विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए अपने जनपद भ्रमण के दौरान आयोजित आंगनबाड़ी सम्मेलनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब छोटे बच्चे मंच पर आकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं, तो उनमें यह विश्वास पैदा होता है कि वे अपने कौशल के बल पर आगे बढ़ सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास और उनकी छिपी प्रतिभा को सामने लाने में सहायक होते हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से आंगनबाड़ी केंद्रों में इस प्रकार की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की अपेक्षा की।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से भी अपेक्षा की कि वे अपने द्वारा गोद लिए गए गांवों और वहां के आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए आवश्यक सामग्री स्थानीय शिल्पकारों से खरीदने की संभावनाओं पर विचार करें। बच्चों के कार्यक्रमों के लिए आवश्यक परिधान और अन्य उपयोगी सामग्री कारीगरों से खरीदकर उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे बच्चों को गतिविधियों में भाग लेने के बेहतर अवसर मिलेंगे और स्थानीय कलाकारों के उत्पादों को नया बाजार प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से शिक्षा, बाल कल्याण, रोजगार सृजन और पारंपरिक कला संरक्षण को एक साथ प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रदर्शनी के शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल जी ने विभिन्न स्टालों पर प्रदर्शित उत्पादों की विशेषताओं में रुचि दिखाई और शिल्पकारों को अपनी कला एवं कौशल को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के आयोजन पारंपरिक हस्तकलाओं को नई पहचान देने, युवा पीढ़ी को कौशल विकास से जोड़ने तथा कारीगरों और उनके परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
ग्रामश्री एवं क्राफ्टरूट्स की संस्थापिका अनारबेन पटेल ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तकलाओं को प्रोत्साहित करने के साथ शिल्पकारों, विशेष रूप से महिला कारीगरों, को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। संस्था से जुड़ी लीना रावल ने बताया कि यह पहल देशभर के 35 हजार से अधिक कारीगरों से जुड़ी है। इसके माध्यम से हस्तशिल्प उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने, कारीगरों की आजीविका को सुदृढ़ करने और पारंपरिक कलाओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम में टाइम्स ऑफ इंडिया के रीजनल हेड श्री मोहित माथुर, रिमझिम इस्पात के सीएमडी श्री योगेश अग्रवाल, श्रीमती सुचित्रा, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, जिला प्रशासन के अधिकारी, विभिन्न जनपदों से आए कारीगरों सहित अनेक गणमान्य नागरिक, उद्यमी और कला प्रेमी उपस्थित रहे।
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