लखनऊ। मौलाना आज़ाद मेमोरियल अकादमी द्वारा हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत 14 से 29 सितंबर तक आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला में बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर अकादमी के महासचिव डॉ. अब्दुल कुद्दूस हाशमी ने कहा कि हिंदी केवल संचार की भाषा नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आज़ाद भारत की भाषाई विविधता के समर्थक थे। उनकी दृष्टि में भाषाएँ एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति को समृद्ध करने वाली सहयात्री हैं। हिंदी को मजबूत करने का अर्थ अन्य भारतीय भाषाओं को कमजोर करना नहीं, बल्कि सभी भाषाओं के बीच संवाद और सम्मान को बढ़ाना है।
डॉ. हाशमी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (छम्च्) 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में बच्चों की मातृभाषा अथवा स्थानीय भाषा के माध्यम से सीखने पर विशेष बल दिया गया है। मातृभाषा में शिक्षा बच्चों की समझ, अभिव्यक्ति और सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज बना सकती है।
उन्होंने बच्चों का आह्वान किया कि वे हिंदी को केवल परीक्षा का विषय न मानें, बल्कि इसे पढ़ने, सोचने, लिखने, प्रश्न करने और नए ज्ञान का सृजन करने की भाषा बनाएं। साथ ही अपनी मातृभाषा और देश की सभी भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करें।
उन्होंने कहा कि हिंदी पखवाड़ा केवल हिंदी के प्रति उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि भाषा के माध्यम से ज्ञान, रचनात्मकता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का संकल्प लेने का अवसर है।
अकादमी द्वारा 14 से 29 सितंबर तक हिंदी पखवाड़े के दौरान बच्चों के लिए भाषण, निबंध, वाद-विवाद, कविता-पाठ, प्रश्नोत्तरी तथा अन्य शैक्षिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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