लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल से आज जन भवन में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित युवा संगम के तहत आईआईटी पलक्कड़, केरल के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आए 55 सदस्यीय दल ने मुलाकात की। दल में 50 विद्यार्थी एवं पांच शिक्षक शामिल हैं। यह दल 22 से 28 अक्टूबर, 2026 तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आतिथ्य में उत्तर प्रदेश के विभिन्न सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले स्थलों का भ्रमण कर रहा है ।

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य देश की विविध संस्कृतियों, भाषाओं, परंपराओं और जीवनशैलियों के बीच आपसी समझ एवं एकता को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम विभिन्न राज्यों के लोगों को एक-दूसरे की संस्कृति, कला, साहित्य और परंपराओं से परिचित कराता है। इससे राष्ट्रीय एकता, भाईचारे, सद्भाव और देशभक्ति की भावना मजबूत होती है। यह पहल विविधता में एकता के भारतीय आदर्श को साकार करते हुए राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल के अंतर्गत ‘युवा संगम’ कार्यक्रम का आयोजन पिछले कई वर्षों से किया जा रहा है जिसका उद्देश्य देश के युवाओं में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समझ और पारस्परिक सहयोग की भावना विकसित करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के विद्यार्थियों को दूसरे राज्यों की संस्कृति, भाषा, खान-पान, वेशभूषा, ऐतिहासिक स्थलों और विकास गतिविधियों को समझने का अवसर मिलता है।
राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनकी यात्रा के अनुभवों तथा इस दौरान मिली प्रेरणा के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विद्यार्थियों से पूछा कि इस यात्रा के दौरान उन्होंने क्या सीखा और यहां से लौटने के बाद इन अनुभवों का उपयोग अपने जीवन में किस प्रकार करेंगे।
राज्यपाल जी ने कहा कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विभिन्न राज्यों का भ्रमण करना नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन, भाषा, व्यवहार, सामाजिक परिस्थितियों और विकास संबंधी व्यवस्थाओं को समझना भी है। इस पहल की भावना तभी सार्थक होगी, जब देश के विभिन्न प्रदेशों के युवा एक-दूसरे की विशेषताओं को जानें, उनसे सीखें और उन अनुभवों को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे यात्रा के दौरान किए गए अवलोकनों एवं अनुभवों पर लेख लिखें तथा अपने परिवार, मित्रों और सहपाठियों के साथ उन पर चर्चा करें। साथ ही, विभिन्न राज्यों की व्यवस्थाओं, विशेषताओं और विकास संबंधी प्रयासों का अध्ययन कर अपने अनुभवों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।
राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों के साथ अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले के समय में आज जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। उन्होंने स्वयं सीमित संसाधनों के बीच दो बच्चों की जिम्मेदारी निभाते हुए नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई पूरी की। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में अनेक कठिनाइयां और चुनौतियां आती हैं, लेकिन उनसे घबराकर हार नहीं माननी चाहिए। दृढ़ संकल्प, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ उनका सामना करना चाहिए। चुनौतियों को अपनी प्रगति में बाधक बनाने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

राज्यपाल जी ने जन भवन में नवरात्रि के दौरान आयोजित गरबा कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि इस कार्यक्रम में सभी ने गरबा सीखा और उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विभिन्न राज्यों की संस्कृति, लोककला और परंपराओं को जानना तथा उन्हें आत्मसात करना ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे उत्तर प्रदेश की संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक जीवन और विशिष्टताओं को समझें तथा यहां से कुछ नया सीखकर जाएं। प्रत्येक प्रदेश की अपनी विशेषताएं होती हैं और हर जगह कुछ न कुछ सीखने योग्य अवश्य होता है।
राज्यपाल जी ने जन भवन में किए गए विभिन्न नवाचारों एवं शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां स्थापित आदर्श माध्यमिक विद्यालय में वंचित परिवारों के 450 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
राज्यपाल जी ने जन भवन परिसर में विकसित विभिन्न वन क्षेत्रों एवं पर्यावरणीय नवाचारों की जानकारी देते हुए पंचतंत्र वन, नक्षत्र वन और मियावाकी वन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जन भवन परिसर में 10,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जीव-जंतुओं के प्रति करुणा जैसे संस्कार बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक हैं।
उन्होंने परिसर में गायों के संरक्षण एवं देखभाल का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां लगभग 40 गायें और बछड़े हैं। बच्चों में गायों के प्रति प्रेम, सेवा और संवेदनशीलता का भाव विकसित करने के उद्देश्य से उन्हें गायों को रोटी और गुड़ खिलाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि युवा संगम के अंतर्गत केरल से आए इस दल ने उत्तर प्रदेश प्रवास के दौरान काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित स्वागत समारोह तथा वृक्षारोपण कार्यक्रम में सहभागिता की। दल द्वारा श्री काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन, सारनाथ सहित अन्य ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण तथा अयोध्या धाम, तीर्थराज प्रयाग और विंध्याचल धाम की यात्रा के माध्यम से उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत को जानने-समझने का अवसर प्राप्त किया जा रहा है।
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