नई दिल्ली । भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने 11 अक्तूबर को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि किसी लंबित मामले पर चर्चा के लिए बैठक बुलाना संविधान में तय शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खि़लाफ़ होगा। रविवार को राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीजेआई से मिलने का वक्त मांगा था। हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था।
कांग्रेस ने सीजेआई सूर्यकांत के जवाब को एक्स पर पोस्ट किया है। पत्र के मुताबिक,सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के लिए ऐसा कदम न्यायिक मर्यादा और स्थापित परंपराओं के अनुरूप नहीं है। सीजेआई ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट को उन मुद्दों पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है, जिनका जिक्र विपक्षी नेताओं के पत्र में किया गया है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 और न्यायिक समीक्षा जैसी शक्तियों के तहत सुप्रीम कोर्ट नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर सुनवाई करने और फ़ैसला देने के लिए बाध्य है। सूर्यकांत ने पत्र में कहा कि सुप्रीम कोर्ट हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और नागरिक क़ानूनी प्रक्रिया के तहत कभी भी अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं।
उन्होंने विपक्षी नेताओं को सलाह दी कि वे प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन देने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लें और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि क़ानून के अनुसार ऐसी किसी भी याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी।

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